पंजाब स्टेट काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी तथा भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सहयोग से जम्मू के भद्रवाह क्षेत्र में तीन दिवसीय लैवेंडर कार्यशाला आयोजित की गई। जिला शिक्षा अधिकारी श्री प्रेम कुमार मित्तल के मार्गदर्शन में जिला रूपनगर की पर्यावरण टीम ने इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग लिया।
जिला टीम में जिला को ऑर्डिनेटर सुखजीत सिंह, बिज़नेस ब्लास्टर्स नोडल इंचार्ज प्रभजीत सिंह, कुलवंत सिंह, श्री चंद्रकांत और संजीव कुमार शामिल थे। टीम ने लैवेंडर की फसल, उसके प्रसंस्करण और उससे बनाए जाने वाले उत्पाद जैसे—एसेंशियल ऑयल, हैंडमेड साबुन, सुगंधित उत्पाद और अन्य आयटम तैयार करने वाली विभिन्न यूनिटों का दौरा किया।
कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि भद्रवाह में लैवेंडर की खेती ने किसानों की आय को पारंपरिक फसलों की तुलना में चार गुना तक बढ़ा दिया है। यह फसल कम पानी, बिना किसी कीटनाशक के भी अच्छी तरह उग जाती है और स्वाभाविक रूप से खेतों में हानिकारक कीटों को दूर रखती है। इस कारण इसे एक अत्यंत पर्यावरण–अनुकूल और टिकाऊ फसल माना जाता है।
जिला कोऑर्डिनेटर सुखजीत सिंह ने बताया कि पंजाब के कुछ ऊँचाई वाले क्षेत्रों, विशेषकर रूपनगर जिले के शिवालिक रेंज वाले इलाकों में लैवेंडर की खेती आसानी से की जा सकती है। इससे किसानों को नई आय के अवसर प्राप्त होंगे और पर्यावरण-अनुकूल कृषि को बढ़ावा मिलेगा।
बिज़नेस ब्लास्टर्स के नोडल इंचार्ज प्रभजीत सिंह ने कहा कि लैवेंडर आधारित उत्पाद छात्रों के लिए एक उत्कृष्ट स्टार्टअप मॉडल बन सकते हैं। स्कूलों में लैवेंडर उत्पाद निर्माण से संबंधित गतिविधियाँ शुरू करने की योजना बनाई जा रही है, ताकि छात्र एसेंशियल ऑयल, साबुन, फ्रेगरेंस और अन्य वैल्यू-एडेड उत्पाद बनाकर उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ सकें।
जिला पर्यावरण टीम और बिज़नेस ब्लास्टर्स टीम ने संयुक्त रूप से रूपनगर जिले में लैवेंडर खेती को बढ़ावा देने के लिए रणनीतियाँ तैयार करनी शुरू कर दी हैं। यह पहल न केवल पर्यावरण के लिए लाभदायक साबित होगी, बल्कि विद्यार्थियों के लिए नवाचार, कौशल विकास और भविष्य के रोजगार के नए रास्ते भी खोलेगी।